बग्वाल मेला - मां बाराही देवी धाम देवीधुरा में होने वाला पाषाण युद्ध (बग्वाल महोत्सव )
बग्वाल मेला - मां बाराही देवी धाम देवीधुरा में होने वाला पाषाण युद्ध | देवीधुरा का प्रसिद्ध बाराही मंदिर उत्तराखंड के चंपावत जनपद में स्थित है | बाराही देवी मंदिर के प्रांगण में प्रतिवर्ष रक्षाबंधन के अवसर पर श्रावणी पूर्णिमा को पाषाण युद्ध बग्वाल मेला होता है| जिसे पत्थरों द्वारा चार पक्षों के परस्पर युद्ध खेला जाता है इसे बग्वाल कहते हैं| इस पाषाण कालीन युद्ध में योद्धा अपने साथ ढाले लेकर आते हैं| जिसे युद्ध के दौरान अपनी रक्षा के लिए इस्तेमाल किया जाता है|
पाषाण युद्ध (बग्वाल मेला) गहड़वाल खाम, चमियाला खाम, वालिक खाम और लमगढ़िया खाम के बीच किया जाता है| श्रावण मास की पूर्णिमा को लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करने वाला पौराणिक धार्मिक ऐतिहासिक स्थल देवीधुरा मां बाराही धाम अपने इस पाषाण युद्ध के लिए पूरे भारत सहित पुरे दुनिया में प्रसिद्ध है|
श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन पूरे भारतवर्ष में रक्षाबंधन का त्यौहार पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है| इस दिन योद्धाओं की बहनें अपने भाइयों को बग्वाल के लिए तैयार करती हैं युद्ध में प्रयोग होने वाले ढाल को सजा कर विदा किया जाता है
मां बाराही देवीधुरा धाम में प्राचीन काल से चली आ रही परंपरा के अनुसार 12वीं धाम में रक्षाबंधन के दिन यहां के स्थानीय लोग चार दलों में विभाजित होकर जिन्हें खाम जाता है| क्रमशः गहड़वाल खाम, चमियाला खाम, वालिक खाम और लमगढ़िया खाम दो समूह में बढ़ जाते हैं|और इसके बाद होता है युद्ध (बग्वाल )जो पत्थरों को अस्त्र के रूप में प्रयोग किया जाता है
इस पाषाण कालीन युद्ध को कुमाऊनी भाषा मे बग्वाल कहा जाता है | यह को बग्वाल कुमाऊं की संस्कृति का अभिन्न अंग है| श्रावण मास में पूरे महीने यहां मेला लगता है| जहां सबके लिए यह दिन रक्षाबंधन का दिन होता है वही कुमाऊं और देवीधुरा के लिए यह दिन पत्थर युद्ध बग्वाल के रूप में जाना जाता है| धार्मिक आस्था के साथ साथ जो स्थान हिमालय के अद्भुत दृश्य के लिए भी जाना जाता है जो भक्तों को एक अलग ही आनंद देता है|देवीधुरा में सिद्धि भी मां बाराही के मंदिर के परिसर के आसपास अन्य स्थलों में खुली कार्ड दुर्गा चौक खोलीगाड़ दुर्वाचोड़ गुफा के अंदर बाराही शक्तिपीठ का दर्शन परिसर में ही स्थित संस्कृत महाविद्यालय परिसर शंखचक्र, घंटाघर, गुफा, भीमशिला आदि प्रमुख हैं|
देवीधुरा में बसने वाली मां बाराही का मंदिर 52 पीठों में से एक माना जाता है| मुख्य मंदिर में तांबे की पेटी में मां बाराही देवी की मूर्ति है| इस बाराही देवी की मूर्ति को अभी तक किसी ने नहीं देखा है| हर साल भाद्रपद कृष्ण प्रतिपदा को बागड़ जाति के क्षत्रिय वंशज द्वारा ताम्र पेटी का को मुख्य मंदिर से नंद गांव में लाया जाता है| जहां आंखों में पट्टी बात कर मां बाराही को स्नान करा कर सिंगार किया जाता है|
पूजा अर्चना के बाद मां बाराही की मूर्ति को गोद में रखकर मंदिर के प्रांगण में परिक्रमा की जाती है| और सभी भक्तों पर मां का आशीर्वाद लेकर सुख की प्राप्ति करते हैं| जय मां बाराही जय मां भगवती
इस पोस्ट को शेयर कर हमारी इस परम्परा को जीवित रखने में सहयोग करे और अपने दोस्तों को इस परम्परा के बारे में बताते अपने दोस्तों को शेयर करना न भुए|
इन्हे भी पड़े -